हर्षोल्लास के साथ मनी बुद्ध जयंती, मेधावी छात्रों और समाजसेवियों का हुआ सम्मान
वीरेंद्र चौधरी
सम्मान पाकर मेधावी छात्रों के खिले चेहरे
मरणोपरांत 'समाज रत्न' से विभूषित हुईं महान विभूतियां
पूर्व पार्षद दल नेता श्री धर्मवीर सिंह को भी 'समाज रत्न' विभूषित किया सम्मानित
आगरा। महाकारुणिक तथागत गौतम बुद्ध की 2570वीं जयंती के पावन अवसर पर बुद्ध जयंती शोभायात्रा समारोह समिति द्वारा दो दिवसीय भव्य महोत्सव का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के अंतिम दिन जहाँ सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम रही, वहीं बौद्ध रीति-रिवाज से विवाह संपन्न कराकर सामाजिक समरसता का संदेश दिया गया।
वहीं शिक्षा के महत्व को रेखांकित करते हुए कार्यक्रम के दूसरे सत्र में मेधावी छात्र /छात्रा सम्मान समारोह आयोजित किया गया। इसमें बैंक ऑफ बड़ौदा (बरेली अंचल) की आगरा शाखा के सहयोग से हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट में 70 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करने वाले लगभग 70 मेधावी छात्र-छात्राओं को 'मोमेंटो' प्रदान कर सम्मानित किया गया। मुख्य अतिथियों ने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए उन्हें राष्ट्र निर्माण में योगदान देने के लिए प्रेरित किया।
समिति ने समाज के प्रति अभूतपूर्व योगदान देने वाले तीन महापुरुषों को मरणोपरांत 'समाज रत्न' की उपाधि से नवाजा। उनके परिजनों ने यह सम्मान ग्रहण किया:
स्व. बंशीधर राजोरिया जी (संस्थापक, बुद्ध जयंती शोभायात्रा समारोह समिति)
स्व. देवी प्रसाद आजाद जी (सरपंच जाटव महापंचायत एवं संस्थापक भीम नगरी)
स्व. भरत सिंह पिपल जी (पूर्व अध्यक्ष एवं संस्थापक भीम नगरी)
इसके साथ ही, समाज में अपने अनुकरणीय कार्यों के लिए पूर्व पार्षद दल नेता श्री धर्मवीर सिंह जी को भी 'समाज रत्न' से विभूषित किया गया।
कार्यक्रम का संचालन प्रमोद वरुण ने किया। इस अवसर पर मुख्य रूप से:
एडिशनल कमिश्नर (GST) गुलाब चंद्र, गोरेलाल जाटव, ब्लॉक प्रमुख इति सिंह, पार्षद मनोज कुमार, पार्षद रजनी, पूर्व जज नेत्रपाल, समिति अध्यक्ष सनेश पिपल, अनिल सोनी, अमित कुमार, जितेंद्र कुमार, शिव मनोहर बौद्ध, पुष्पेंद्र कुमार सिंह, डॉ. आनंद आजाद, प्रेम कुमारी पिपल, रवि कांत मुल्लाजी, बाबू बच्चू सिंह, मोहन सिंह वरुन, नरेंद्र सेहरा, सुशील कुमार, मनीष सोन, योगेश अंबेडकर, पीयूष कैन, मुकेश केन, सुनील सागर, चंद्र मोहन, अवधेश पिपल, विनोद मास्टर, संजय सविता, रवींद्र निम और सुरेंद्र मौर्य आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।